
भारत में जंहा रोज नई तकनीक विकसित हो रही है उसके लिये प्रोफेस्नलों की भी मांग बढ़ती जा रही है। इन सब के बाद भी देश में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है । आईआईएम् व आईआईटी जैसे शिक्षण संस्थानों से शिक्षा पाने वाले छात्र या तो विदेश चले जाते है या अपने हीं देश में रहकर मोटी रकम कमाते है । वंही दूसरी तरफ सामान्य दर्जे के जो शिक्षण संस्थान है वंहाके छात्र नौकरी प्राप्त कर लेते है है या ओ भी शिक्षित बेरोजगारों के कतार में खडे हो जाते है । सरकार सभी को रोजगार मुहैया कराने की बात तो करती हैं , लेकिन क्या उनलोगों पर ध्यान देती है जो उच्य डिग्री प्राप्त करके भी सडको पर घूम रहे है। कुछ दिन पहले की बात है, केंद्रीय ग्रामीण मंत्री रघुवंस प्रसाद सिंह एक सेमिनार में कहा की लोगों को स्वरोजगार करना चाहिए ताकि अपने साथ- साथ और भी लोगों को रोजगार मिल सके । मंत्री जी का सुझाव तो अच्छा लगा, लेकिन इस पहलू पर मेरा विचार यह है की लोगों को रोजगार के लिए पैसों की जरुरत होती है जिसे लोन लेकर हीं पुरा किया जा सकता है और मध्यम वर्गीय परिवार को बहुत ही मुश्किल से लोन मिलता है। केन्द्र सरकार यदि चाहती है की देश तरकी करे सबसे पहले बेरोजगारों को उनके शिक्षा के अनुरूप रोजगार मुहैया करना होगा । यदि सरकार इनमे विफल होती है तो हम जिस विकशित देश का सपना देख रहे है उसे छोर देना चाहियऐ ।
1 comment:
काफी ज्ञानवर्धक ब्लॉग है आपका. सच आज के इस दौर में बेरोजगार होना कितना बड़ा श्राप है ये तो किसी पढे लिखे बेरोजगार से पूछो तो वही बताएगा.
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