Tuesday, March 25, 2008
पिता ने काटी पुत्री की नाक
बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया थाना क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसको सुनकर आपके रूह कांप जायेंगे । एक पिता ने अपनी नौ वर्षीया पुत्री की नाक महज इसलिए काट डाली क्योंकि उसे अपना मंत्र सिद्ध करना था। घटना की खबर पाते ही पुलिस ने किशोरी को अस्पताल में भर्ती कराया तथा पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अन्धविश्वास में डूबे विक्षिप्त पिता ने पुत्री की नाक काटकर घर के मंडप में स्थापित ईष्ट देवी के पिंड पर चढ़ाकर मंत्र सिद्ध किया। विक्षिप्त पिता ने दो माह पूर्व भी अपनी बेटी के साथ कुछ ऐसी ही हरकत करने की कोशिश की थी लेकिन वह सफल नहीं हो सका था। अस्पताल में भर्ती लड़की की हालत बहुत ही नाजुक स्थिति में है। यह कैसा समाज है जंहा आज भी इस तरह के कार्य को अंजाम दिया जाता है।
Monday, March 24, 2008
शिक्षित बेरोजगारों की बढ़ती संख्या

भारत में जंहा रोज नई तकनीक विकसित हो रही है उसके लिये प्रोफेस्नलों की भी मांग बढ़ती जा रही है। इन सब के बाद भी देश में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है । आईआईएम् व आईआईटी जैसे शिक्षण संस्थानों से शिक्षा पाने वाले छात्र या तो विदेश चले जाते है या अपने हीं देश में रहकर मोटी रकम कमाते है । वंही दूसरी तरफ सामान्य दर्जे के जो शिक्षण संस्थान है वंहाके छात्र नौकरी प्राप्त कर लेते है है या ओ भी शिक्षित बेरोजगारों के कतार में खडे हो जाते है । सरकार सभी को रोजगार मुहैया कराने की बात तो करती हैं , लेकिन क्या उनलोगों पर ध्यान देती है जो उच्य डिग्री प्राप्त करके भी सडको पर घूम रहे है। कुछ दिन पहले की बात है, केंद्रीय ग्रामीण मंत्री रघुवंस प्रसाद सिंह एक सेमिनार में कहा की लोगों को स्वरोजगार करना चाहिए ताकि अपने साथ- साथ और भी लोगों को रोजगार मिल सके । मंत्री जी का सुझाव तो अच्छा लगा, लेकिन इस पहलू पर मेरा विचार यह है की लोगों को रोजगार के लिए पैसों की जरुरत होती है जिसे लोन लेकर हीं पुरा किया जा सकता है और मध्यम वर्गीय परिवार को बहुत ही मुश्किल से लोन मिलता है। केन्द्र सरकार यदि चाहती है की देश तरकी करे सबसे पहले बेरोजगारों को उनके शिक्षा के अनुरूप रोजगार मुहैया करना होगा । यदि सरकार इनमे विफल होती है तो हम जिस विकशित देश का सपना देख रहे है उसे छोर देना चाहियऐ ।
Thursday, March 20, 2008
होली मुबारक हो
Saturday, March 15, 2008
दिल्ली नॉएडा बसों में गुंडागर्दी

दिल्ली से नॉएडा जाने वाली बसों में यात्रियों को काफी मुश्किलो का सामना करना पड़ता है । अक्सर देखा जाता है कि बसों के परिचालक यात्रियों से ढंग से पेश नही आते । यदि आप नॉएडा जा रहे है तो जरा संभल के कंही ऐसा न हो की आपका मूड ख़राब हो जाय, जब मूड ही ख़राब हो जाएगा तो आप ही आप बताये आप कोई काम ढंग से कर पाएंगे । अक्सर देखा जाता है बस परिचालाक यात्रियों से जानवरों की तरह व्यवहार करते है यदि कोई यात्री इसका विरोध करता है तो उसे बस से निचे फेंक देने की धमकी भी देते है। ये दिल्ली सरकार का कैसा कानून है जहा बस वाले खुलेआम गुंडागर्दी करते और उनका सुध लेने वाला कोई नही है । दिल्ली सरकार हमेश महिलाओ की सुरक्ष की बात करती है , लेकिन ये बात ठेंगा नजर आती है , दिल्ली नॉएडा बसों में सबसे अधिक मुश्किलो का सामना महिलओं को ही करना पड़ता है । चुकी ये महिलाए कामकाजी होती है इसलिए इन्हे अक्सर इन बसों में यात्रा करनी पड़ती है छेरछार की घटना तो अब आम बात हो गई है । ये थाने में रिपोर्ट भी दर्ज नही करा सकती क्योंकि इन बसों में इनका रोज का आना जाना होता है। अधिकतर महिलओं का कहना है की दिल्ली नॉएडा बसों में यात्रा तो इश्वर भरोसे ही होता है ।
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